Rewa news: महिला पत्रकार नेहा त्रिपाठी की बड़ी जीत: जल संसाधन विभाग में 700 करोड़ के कथित घोटाले की शिकायत के बाद रची गई साजिश का पर्दाफाश, जुड़े अन्य मामले में रीवा कोर्ट से आरोपियों को सजा

Rewa news: रीवा जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र ग्राम डीही निवासी और अखिल भारतीय पत्र महासंघ से जुड़ी महिला पत्रकार नेहा त्रिपाठी के संघर्षों को आखिरकार न्याय मिला है। मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ग्वालियर जोन के अंतर्गत जल संरचनाओं के निर्माण में हुए लगभग 700 से 800 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के बाद, पीड़िता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे। हालांकि, जबलपुर उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और रीवा जिला न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद अब पूरे मामले की सच्चाई सामने आ चुकी है।
क्या है पूरा मामला
पत्रकारिता के साथ-साथ समाज सेवा और एल.एल.बी. की पढ़ाई कर रहीं नेहा त्रिपाठी ने जल संसाधन विभाग में जारी करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के सबूत जुटाए थे। इस कथित घोटाले में तत्कालीन ओ.एस.डी., निज सचिव/सहायक तथा ग्वालियर जोन के सैकड़ों कर्मचारियों एवं अधिकारियों के संलिप्त होने के आरोप थे।
नेहा त्रिपाठी का आरोप है कि जब उन्होंने इस भ्रष्टाचार को उजागर करने की पहल की और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष तथ्य प्रस्तुत किए, तो घोटाले में शामिल लोगों ने खुद को बचाने के लिए उनके साथ दुर्व्यवहार किया तथा आपराधिक कृत्य किए।
भोपाल में दर्ज कराई गई थी झूठी एफआईआर
पीड़िता ने जब इस पूरे वाकये की शिकायत भोपाल पुलिस प्रशासन से की, तो निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपियों के प्रभाव में आकर पुलिस ने महिला पत्रकार के खिलाफ ही षड्यंत्र रच दिया।
फर्जी दस्तावेजों का सहारा: 7 जून 2024 को हबीबगंज थाना (भोपाल) में अपराध क्रमांक 310/2024 दर्ज किया गया। चालान में लगाए गए 67 पेज के दस्तावेज पूरी तरह अस्पष्ट, अपठनीय और अप्रामाणिक थे।
अदालत से मिली राहत: भोपाल कोर्ट ने चालान के झूठे और मनगढ़ंत होने के कारण महिला पत्रकार को तुरंत जमानत पर रिहा कर दिया और पुलिस अधिकारियों के गलत कृत्य पर जवाब-तलब किया।
हाई कोर्ट का सख्त रुख और आदेश
पुलिस द्वारा बार-बार अपठनीय व फर्जी फोटोकॉपी पेश करने पर नेहा त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट पिटीशन (WP No. 7925/2026) दायर की।
12 अगस्त 2026 का आदेश: न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत ने पाया कि चालान के साथ लगाए गए दस्तावेज वाकई अपठनीय हैं। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिया कि संबंधित पुलिस स्टेशन से स्पष्ट/टाइप की गई कापियां मंगवाकर ट्रायल कोर्ट और पिटीशनर को उपलब्ध कराई जाएं।
16 सितंबर 2026 का आदेश: माननीय न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए पीड़िता को RTI Act, 2005 के तहत संबंधित विभागों से बिना समय गंवाए स्पष्ट और मूल दस्तावेज प्राप्त करने की स्वतंत्रता प्रदान की।
रीवा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला दोषियों को 9 माह की सजा
मामले से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि पीड़ित महिला पत्रकार और उनके परिवार को प्रताड़ित करने वाले पूर्व प्रतिवादियों के खिलाफ रीवा न्यायालय में आपराधिक प्रकरण (RCT No. 191/2014) विचाराधीन था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला रीवा रंजीत भदकारिया की अदालत ने 26 सितंबर 2026 को अंतिम निर्णय सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया:
लवकुश त्रिपाठी पिता: गोपीनाथ त्रिपाठी
प्रमोद त्रिपाठी पिता: रामानुज त्रिपाठी
सरस्वती त्रिपाठी पति: प्रमोद त्रिपाठी
राजकुमार पाण्डेय पिता: रामस्वरूप पाण्डेय
धारा 323 (भा.दं.सं.): 03-03 माह का साधारण कारावास और ₹100-₹100 का अर्थदण्ड।
धारा 325 (भा.दं.सं.): 06-06 माह का साधारण कारावास और ₹200-₹200 का अर्थदण्ड।
कुल मिलाकर दोषियों को 9 माह के कारावास और अर्थदण्ड से दंडित किया गया।
यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि किस तरह एक निडर महिला पत्रकार द्वारा भ्रष्टाचार उजागर करने पर उन्हें प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, न्यायपालिका पर विश्वास और लगातार कानूनी लड़ाई के बल पर नेहा त्रिपाठी ने न सिर्फ अपने ऊपर लगे झूठे आरोपों का सच सामने लाया, बल्कि उन्हें प्रताड़ित करने वाले दोषियों को भी कानून के कटघरे में खड़ा कर दिया।
