Rewa news: रीवा: हत्या के इरादे से घुसे पड़ोसियों ने 80 साल के बुजुर्ग पर सब्बर से जानलेवा हमला, पैर में उतार दिया सब्बर; थाने में न्याय की भीख मांगता रहा बेटा, क्या थाने में न्याय पाने के लिए किसी की अर्थी उठने का इंतजार किया जाता है?

Rewa news: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र अंतर्गत शाहपुर क्योटीगांव से एक ऐसी खौफनाक और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत, कानून और पुलिसिया व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जमीनी विवाद की हवस में अंधे हुए आधा दर्जन दबंगों ने घर में घुसकर एक 80 वर्षीय बुजुर्ग रामानुज पांडेय को मौत के घाट उतारने की नीयत से ब र्बरता की सारी हदें पार कर दीं। लोहे के सब्बर और डंडों से लैस होकर आए करीब आधा दर्जन हमलावरों ने वृद्ध को तब तक पीटा जब तक वे लहूलुहान होकर बेहोश नहीं हो गए। इस खूनी खेल में बुजुर्ग के पैर में सब्बर तक उतार दिया गया, जिसके बाद वे तड़पते हुए दो घंटे तक घर के भीतर अचेत पड़े रहे।

Rewa news: खौफनाक मंजर: घर में अकेले थे बुजुर्ग दंपत्ति, आधा दर्जन लोगों ने बोला धावा
पीड़ित 80 वर्षीय रामानुज पांडेय अपने घर में अपनी बुजुर्ग पत्नी के साथ अकेले जीवन गुजार रहे हैं, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्य रोजी-रोटी के सिलसिले में रीवा और भोपाल में रहते हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंग पड़ोसी पिछले कई वर्षों से उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करने की फिराक में हैं। जब भी बुजुर्ग ने अपनी गाढ़ी कमाई की जमीन को बचाने की कोशिश की, इन आरोपियो ने उन पर हमला बोल दिया।
18 अक्टूबर की शाम करीब 6 से 7:00 बजे का वक्त था। अचानक आधा दर्जन की संख्या में महिला, पुरुष लाठी-डंडों और लोहे के सब्बर से लैस होकर रामानुज पांडेय के घर में घुस आए। बिना किसी लिहाज के उन्होंने 80 साल के बुजुर्ग को निशाना बनाया और बेरहमी से तब तक पीटते रहे जब तक वे बेसुध होकर जमीन पर ढेर नहीं हो गए।
Rewa news: 2 घंटे तक दर्द से सिसकते रहे बुजुर्ग, मदद को आगे नहीं आई पुलिस तुरंत
मारपीट के बाद जब बुजुर्ग बेहोश हो गए, तो उनकी सुध लेने वाला आसपास कोई नहीं था। वे दो घंटे तक घर के अंदर जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे।
आखिरकार जब मामले की सूचना फोन के जरिए सिरमौर थाने को दी गई, तब पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अचेत अवस्था में पड़े बुजुर्ग को सिरमौर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी नाज़ुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर तुरंत रीवा के लिए रेफर कर दिया। बुजुर्ग के शरीर पर आए अनगिनत घाव और पैर में घुसा सब्बर इस बात की गवाही दे रहे थे कि हमलावरों के दिल में जरा भी दया नहीं थी।
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जब लहूलुहान पिता रामानुज पांडेय की इस बर्बरता की शिकायत लेकर उनका बेटा सुभाष पांडेय रात करीब 10:00 बजे सिरमौर थाने पहुंचा, तो पुलिस का संवेदनहीन चेहरा सामने आया।
FIR से कन्नी काटने का खेल: सिरमौर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल करना शुरू कर दिया और बेतुका तर्क दिया कि “जब अस्पताल से बुजुर्ग की छुट्टी हो जाएगी, तब एफआईआर दर्ज होगी।” सवाल यह उठता है कि क्या थाने में न्याय पाने के लिए किसी की अर्थी उठने का इंतजार किया जाता है?
शक के घेरे में पुलिसिया इतिहास: परिजनों का आरोप है कि पिछले 10 साल से चल रहे इस विवाद में पुलिस ने कभी निष्पक्षता नहीं दिखाई। हद तो तब पार हो गई जब पूर्व के विवादों में पुलिस ने आंखें मूंदकर 80 साल के बुजुर्ग पर ही उल्टा एफआईआर दर्ज कर उन्हें आरोपी बना दिया। क्या कोई 80 साल का वृद्ध अकेले 10 लोगों से मारपीट कर सकता है? खुद हमला सहने वाले बुजुर्ग को ही अपराधी बना देना सिरमौर पुलिस की कार्यशैली पर एक काला धब्बा है।
Rewa news: न्याय की आस में भटक रहा परिवार
एक तरफ 80 साल के रामानुज पांडेय रीवा के अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सिरमौर पुलिस अपराधियों की ढाल बनकर बैठी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासनिक अमला और जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस संगीन मामले में संज्ञान लेते हुए खाकी को दागदार बनाने वाले लापरवाह कर्मियों और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजों में ही न्याय दम तोड़ता रहेगा?
